कानपुर 92 करोड़ की कहानी: अफसर, संपत्ति और ‘विजिलेंस बाबा’ की एंट्री

महेंद्र सिंह
महेंद्र सिंह

कानपुर पुलिस महकमे में एक ऐसा केस खुला है, जिसने आला अफसरों की नींद उड़ा दी है। पूर्व पुलिस अधिकारी  ऋषिकांत शुक्ला पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का ‘सदुपयोग’ इतना बढ़ा दिया कि सीधी तनख्वाह से 92 करोड़ की प्रॉपर्टी खड़ी कर दी!
वो भी यूपी के चार जिलों में — कानपुर, लखनऊ, उन्नाव और प्रयागराज में!

SIT की जांच में खुलासा

SIT की रिपोर्ट कहती है कि शुक्ला ने व्यापारी अखिलेश दुबे के साथ मिलकर रिश्तेदारों के नाम पर ज़मीन, फ्लैट और फार्महाउस खरीदे।
रिपोर्ट की कॉपी जैसे ही शासन तक पहुंची, विजिलेंस विभाग ने तुरंत जांच के आदेश ठोंक दिए। अब बैंक अकाउंट से लेकर प्रॉपर्टी रजिस्ट्री तक सबकी स्कैनिंग शुरू हो गई है।

सस्पेंशन और ‘सिस्टम शॉक’

पहला झटका — निलंबन का आदेश!
दूसरा झटका — विजिलेंस ने आयकर विभाग को भी बुला लिया।
संयुक्त पुलिस आयुक्त आशुतोष कुमार ने कहा, “आरोप गंभीर हैं, जांच में पारदर्शिता रखी जाएगी। दोषी पाए गए तो विभागीय और कानूनी दोनों एक्शन होंगे।”

पुलिस से ‘प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी’ तक का सफर

सूत्रों का कहना है कि मामला अब ‘वेतन बनाम वैभव’ का हो चुका है। विजिलेंस टीम बैंक ट्रांजैक्शन, शेल कंपनियों और नकली लोन की तहकीकात कर रही है। कहा जा रहा है, अगर सबूत पुख्ता निकले तो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज होगा। 

पुलिस महकमे में यह मामला अब ‘करियर vs करप्शन’ की मिसाल बन चुका है। विजिलेंस की हर फाइल अब कानपुर में ब्रेकिंग न्यूज़ बन रही है। कहानी बस यही — “जहां सेवा होनी थी, वहां से सिविल लाइन निकल आई!”

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